*एक बीज बिना किसी आवाज़ के बाहर निकलता है,*
*लेकिन एक पेड़...
Ummah Post
23 November, 2024

*एक बीज बिना किसी आवाज़ के बाहर निकलता है,*

*लेकिन एक पेड़ ज़बरदस्त आवाज़ के साथ ज़मीन पर गिरता है*

*तबाही आवाज़ रखती है और रचना (تخلیق) खामोशी,*

*यह खामोशी की ताकत है, खामोशी से जिएं।*

Share this article
दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)
लेख

दीन की सेवा और आपसी एकता (एक सीख)

लीसेस्टर (ब्रिटेन) में उलेमा-ए-किराम (विद्वानों) की एक महफ़िल में एक बार हज़रत मौलाना शाह अबरारुल हक़ हरदोई साहब (रहमतुल्लाह अलैह) ने फ़रमाया: "मान लीजिए कि इंडिया के किसी गांव में किसी भारी शरीर वाले व्यक्ति का देहांत (انتقال) हो गया। जून-जुलाई की भीषण गर्मी हो, क़ब्रिस्तान कई किलोमीटर की दूरी...