✍🏻 *अक्सर लोग कहते हैं कि हमसे गलत बात बर्दाश्त नहीं होती, हालांकि गलत बात बर्दाश्त करना ही तो सब्र है। सही बात बर्दाश्त नहीं की जाती बल्कि तस्लीम (स्वीकार) की जाती है।* ☝🏻💞☝🏻💞☝🏻💞☝🏻💞☝🏻💞☝🏻
हज़रत अबू क़िलाबा रहमतुल्लाह अलैह एक जलील-उल-क़द्र (उच्च कोटि के) ताबेई और बहुत बड़े मुहद्दिस (हदीस के विद्वान) हैं। वह हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु के शागिर्द हैं। आप बसरा में रहते थे और अपने ज़माने के अत्यंत साबिर व शाकिर (धैर्यवान और कृतज्ञ) इंसान थे। इतिहास में आपके सब्र व शुक्र की एक घटना मिलती...