हमारे बचपन की वो अफ़वाहें, जो आज भी हमें याद आती हैं। 😉😉 त...
Ummah Post
27 November, 2024

हमारे बचपन की वो अफ़वाहें, जो आज भी हमें याद आती हैं। 😉😉 तो फिर चलें, मिलकर वो अफ़वाहें, वो यादें ताज़ा करते हैं। जैसे कि:

पेंसिल के कचरे (छिलके) को दराज में रखने से तितली बन जाती है। 😂😂

तरबूज (या किसी फल) का बीज खा लिया तो पेट में पेड़ उग आएगा। 😂😂

सब्जियों के इतने फायदे गिनाए जाते थे जो खुद सब्जियों को भी पता नहीं होंगे। 😂😂

चांद पर बुढ़िया चरखा चला रही है। 😁😁

चांदनी रात में परियां आएंगी। 😂😂

चारपाई पर चप्पल समेत बैठ जाने से सांप आ जाता है। 😂😂

टूटा हुआ दांत घर की छत पर फेंक कर यह कहने से कि: "चिड़िया चिड़िया पुराना दांत ले जा और नया दे जा" नया दांत मिल जाता है। 😁😁

टीचर की कुर्सी पर बैठोगे तो फेल हो जाओगे। 😂😂😜

पतीली में खाना खाने से शादी में बारिश होती है। 😂😂

कैंची को खाली चलाने से घर में लड़ाई होती है। 😂😂

"आल्तो जलाल तू, आई बला को टाल तू" बोलने से टीचर नहीं मारेंगी। 😂😂

नमक गिरते ही पानी बहाओ वरना कयामत के दिन पलकों से उठाना पड़ेगा। 😂😂

मगरिब (सूर्यास्त) से पहले अपने-अपने घरों को चले जाओ क्योंकि मगरिब के बाद सर-कटा (बिना सिर का भूत) निकलता है और वो बच्चों को मार देता है। 😂😂

पेंसिल के कचरे को दूध में पकाने से इरेज़र (रबर) बनती है। 😂😂

हमारा स्कूल कब्रिस्तान पर बना हुआ है। 😂

"झूठ बोलोगे, तो ज़ुबान काली हो जाएगी।" 😂😂

हालांकि जाहिर तौर पर यह भी एक झूठ था। 😂😂

मछली खाने के बाद पानी मत पीना वरना वो पेट में तैरेगी। 😂😂

कोई आपके ऊपर से लांघ (कूद) जाए तो आपका कद छोटा रह जाएगा। 😂😂

और अब इसमें आप और इजाफा (बढ़ोतरी) कर दें।

#जानां🦋

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