एक शख़्स ने इमाम इब्राहीम बिन अदहम रहमतुल्लाह अलैह से अर्ज़...
Ummah Post
10 December, 2024

एक शख़्स ने इमाम इब्राहीम बिन अदहम रहमतुल्लाह अलैह से अर्ज़ किया:

"मैं रात को नमाज़ (तहज्जुद) नहीं पढ़ पाता हूँ, इसलिए मुझे कोई दवा तजवीज़ (बता) कर दें।"

उन्होंने कहा:

"दिन में अल्लाह की नाफ़रमानी न करो, वह तुम्हें रात को अपने सामने खड़ा करेगा; क्योंकि तुम्हारा रात को उसके सामने खड़ा होना, सबसे बड़े एज़ाज़ (सम्मान) में से है; और नाफ़रमान इस इज़्ज़त का मुस्तहिक़ (हक़दार) नहीं है!"

— इमाम इब्राहीम बिन अदहम रहमतुल्लाह अलैह

(फ़स्लुल ख़िताब फ़िल-ज़ुहदि वर-रक़ा'इक़ि वल-आदाब: 9/400)

Share this article
हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!
लेख

हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!

(नोट: इस घोषणापत्र के संबोधित व्यक्ति केवल शरिया विज्ञान (उलूम-ए-शरीयत) के छात्र हैं।) आरिफ़ों (अल्लाह की पहचान रखने वालों) ने शरिया के ज्ञान को इस तरह परिभाषित किया है कि यह अल्लाह का नूर (प्रकाश) है जो बंदे के सीने में रोशन हो जाता है। यह नूर दिल में चिराग की लौ की तरह पूरी तरह महसूस होता है। ब...