*उर्दू की खूबसूरती देखिए*
*सुबह-सुबह लखनऊ फोन पर एक दोस्त से पूछा, क्या कर रहे हो प्यारे ?*
*बोला: अभी मैं बड़ी शिद्दत से इज़्ज़त व अज़मत (मान-सम्मान) की डोर को बेपनाह उलझनों की गिरफ़्त से आज़ाद करने की कशमकश में मुब्तला (व्यस्त) हूँ।*
*मैंने कहा: समझा नहीं.😕*
*बोला: पाजामे के नाड़े में गांठ पड़ गई है वही खोल रहा हूँ।*
😂😅😄😆🤣😃😜😄😆😅
*लतीफ़ों की दुनिया 😊*