अज़ाब (कष्ट) देने वाली चीज़ क्यों देखें:
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हज़रत ग़ज़वान रहमतुल्लाह अलैह किसी जंग में शरीक थे, उनके सामने एक लड़की आ गई। आपने उसको देख लिया, फिर अपना हाथ उठाकर अपनी आँख को एक चपत (थप्पड़, चांटा) लगाई कि वह लड़की (भी ख़ौफ़ के मारे) भाग गई और उन्होंने अपनी आँख को मुखातिब करके फ़रमाया:
(कि ख़बरदार) तू उस चीज़ को देखती है जो तुझे (आख़िरत में) मुसीबत में डाल देगी।
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किताब: इश्क़-ए-मजाज़ी की तबाह कारियाँ
(सफ़ा नंबर 107)
मुसन्निफ़ (लेखक): इमाम इब्न जौज़ी रह०
तरजुमा (अनुवाद): मौलाना मुफ़्ती इमदादुल्लाह अनवर साहब