माह-ए-सियाम (रमज़ान के महीने) के मौक़े पर हरम-ए-मक्की (मक्का शरीफ़) में ये सात अइम्मा इकराम (इमाम) रोज़ाना तरावीह की इमामत फ़रमाएंगे और आख़िरी अशरे (अंतिम 10 दिनों) में क़ियाम-उल-लैल (तहज्जुद) पढ़ाएंगे।
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