مشکوٰۃ المصابیح
کتاب: روزوں کا بیان 
باب: نفلی روزوں کا بی...
Ummah Post
20 March, 2025

مشکوٰۃ المصابیح

کتاب: روزوں کا بیان

باب: نفلی روزوں کا بیان

حدیث نمبر: 2068

قَالَتْ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصُومُ يَوْمَ السَّبْتِ وَيَوْمَ الْأَحَدِ أَكْثَرَ مَا يَصُومُ مِنَ الْأَيَّامِ وَيَقُولُ: «إِنَّهُمَا يَوْمَا عِيدٍ لِلْمُشْرِكِينَ فَأَنَا أُحِبُّ أَن أخالفهم» . رَوَاهُ أَحْمد

अनुवाद:

उम्मे सलमा रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैं, रसूलुल्लाह ﷺ ज़्यादातर हफ़्ता (शनिवार) और इतवार (रविवार) के दिन रोज़ा रखा करते थे, और आप ﷺ फ़रमाया करते थे: "यह दोनों मुशरिकों के ईद (त्योहार) के दिन हैं, लिहाज़ा मैं उनकी मुख़ालफ़त (विरोध/अलग तरीक़ा अपनाना) करना पसंद करता हूँ।" इसकी इसनाद (सनद) हसन है, इसे अहमद ने रवायत किया है।

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ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?
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ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?

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