ग़ज़ा मुकम्मल तौर पर (पूरी तरह) जल गया, अब उनके लिए दुआओं का...
Ummah Post
5 April, 2025

ग़ज़ा मुकम्मल तौर पर (पूरी तरह) जल गया, अब उनके लिए दुआओं का वक़्त ख़त्म हुआ,

अब अपने लिए इस्तग़फ़ार (क्षमा याचना) का वक़्त है 😭

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युवा पीढ़ी की तरबियत: शरीयत बनाम सामाजिक परंपराएँ
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युवा पीढ़ी की तरबियत: शरीयत बनाम सामाजिक परंपराएँ

कितने पुरुष हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अल-माएदा" की तफ़सीर पढ़ाई गई और कितनी महिलाएँ हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अन-नूर" की तफ़सीर पढ़ाई गई? जानता हूँ, बहुत कम हैं। मगर दूसरी तरफ देखें...! कितने पुरुष हैं जिन्होंने माता-पिता से बालिग होने के बाद सुना कि "तुम्हारी कोई ऐसी-वैसी बात न स...