*┄┅═❁ उर्दू अदब (साहित्य) ❁═┅┄*

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*🪴 कभी बेट...
Ummah Post
24 April, 2025

*┄┅═❁ उर्दू अदब (साहित्य) ❁═┅┄*

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*🪴 कभी बेटी کو ज़िम्मेदारी नहीं,*

*रब की तरफ़ से "अमानत" समझो...!*

*🍃 कभी बहन को बोझ नहीं,*

*"दुआओं की ढाल" समझो...!*

*☘️ कभी माँ को बुढ़ापे में बोझ नहीं,*

*"जन्नत की चाबी" समझो...!*

*🌿 कभी बीवी को पाबंदी नहीं,*

*"सुकून-ए-दिल" (दिल का सुकुन) समझो...!*

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*┅┈•※ ͜✤☆उर्दू अदब☆✤͜※┅┄*

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हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)
लेख

हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)

एक बार हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी (रह.) पर ग़द्दारी (राजद्रोह) का मुक़दमा चला और फ़िरंगी (अंग्रेज़) की अदालत हॉल कराची में उनकी पेशी हुई। मौलाना मोहम्मद अली जौहर और बहुत सारे दूसरे अकाबरीन (वरिष्ठ नेता) भी वहाँ जमा थे। फ़िरंगी ने बुलाया और कहा, "हुसैन अहमद! यह जो तुमने फ़तवा दिया है कि अंग्रेज़ की...