यह घटना एक मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़ी है। एक पिता की दास्तान सुनिए जो कुर्बानी करने में असमर्थ है।
"बाबा.... बाबा .... हमें भी गोश्त मिलेगा ना?"
मैंने कहा: "हाँ-हाँ, क्यों नहीं, बिल्कुल मिलेगा।"
"लेकिन बाबा ....पिछली ईद पर तो किसी ने भी हमें गोश्त नहीं दिया था, अब तो पूरा साल हो गया है गो...