मिर्ज़ा ग़ालिब कहते हैं कि आम में दो खूबियाँ होनी चाहिए:
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Ummah Post
28 April, 2025

मिर्ज़ा ग़ालिब कहते हैं कि आम में दो खूबियाँ होनी चाहिए:

"अव्वल (पहली) वह मीठे हों, दोम (दूसरी) ब-कसरत (प्रचुर मात्रा में) हों।"

अल्लामा इक़बाल को 'लंगड़ा' आम बहुत पसंद था। एक बार मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी ने अल्लामा इक़बाल को लंगड़े आमों का तोहफा डाक के ज़रिए भिजवाया, तो अल्लामा इक़बाल ने पार्सल की रसीद पर यह यादगार मिसरा (पंक्ति) लिखकर भेजा:

"असर यह तेरे एजाज़-ए-मसीहाई का है अकबर,

इलाहाबाद से लंगड़ा चला, लाहौर तक पहुँचा।"

लिहाज़ा आम हों,

ढेर सारे हों,

मुफ़्त के हों,

और ठंडे हों...

ख़ालिक (इश्वर) को है मक़सूद कि मख़्लूक़ (सृष्टि) मज़ा ले,

वह चीज़ बना दी कि बूढ़ा भी चबा ले।

आम का मौसम आ गया है, लिहाज़ा अपने साथ हमारा भी ख़्याल रखें! 😅

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खौफ-ए-इलाही (अल्लाह का डर) भी मारिफत (पहचान) का नतीजा है!!
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इमाम जलालुद्दीन रूमी (रह.) ने लिखा है कि एक आदमी सफर पर निकला। वह एक जंगल में चलता रहा और बहुत दूर चलने के बाद उसे भारी थकान महसूस हुई, जिसके कारण उस पर नींद हावी हो गई। उसने सोचा कि कहीं आराम कर ले; लेकिन सिर्फ इसलिए हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वह जंगल का रास्ता था। उसने सोचा, "जंगल के रास्ते में भला क...