×××××× *गीबत (पीठ पीछे बुराई करना)* ××××××
"गीबत करना ऐसा ही है जैसे किसी के हाथ में अपना क्रेडिट कार्ड थमा देना, जिससे आपके अकाउंट की रकम उसके हाथ चली जाए।
गीबत से बिल्कुल इसी तरह हमारी नेकियाँ (पुण्य) दूसरे के आमालनामे (कर्म-पुस्तिका) में ट्रांसफर होती रहती हैं।
अल्लाह हमें अपनी नेकियों की हिफ़ाज़त करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।"