"कर सकूँ कैसे भला मिदहत-ए-मम्दूह-ए-ख़ुदा (जिसकी तारीफ़ अल्ला...
Ummah Post
2 May, 2025

"कर सकूँ कैसे भला मिदहत-ए-मम्दूह-ए-ख़ुदा (जिसकी तारीफ़ अल्लाह ने की हो),

मैं तो बस उनके (ﷺ) सनाख़्वानों (प्रशंसकों) में शुमार चाहता हूँ।

जान वार कर भी न हो सके हक़ अदा उनके इक आँसू का,

मैं तो ग़ुलामों की फेहरिस्त (सूची) में नाम चाहता हूँ।

ﷺﷺﷺﷺ"

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लेख

एक मामूली वाक़या, एक अज़ीम (बड़ा) सबक़

लंदन में एक इमाम साहब रहते थे। रोज़ाना घर से मस्जिद जाने के लिए बस पर सवार होकर दूर मस्जिद तक जाना उनका नियम था। लंदन में तय समय और एक ही रूट पर बसों में सफर करते हुए कई बार ऐसा हुआ कि बस भी वही होती थी और बस का ड्राइवर भी वही होता था। एक बार ये इमाम साहब बस पर सवार हुए, ड्राइवर को किराया दिया और बा...