"कर सकूँ कैसे भला मिदहत-ए-मम्दूह-ए-ख़ुदा (जिसकी तारीफ़ अल्लाह ने की हो),
मैं तो बस उनके (ﷺ) सनाख़्वानों (प्रशंसकों) में शुमार चाहता हूँ।
जान वार कर भी न हो सके हक़ अदा उनके इक आँसू का,
मैं तो ग़ुलामों की फेहरिस्त (सूची) में नाम चाहता हूँ।
ﷺﷺﷺﷺ"
"कर सकूँ कैसे भला मिदहत-ए-मम्दूह-ए-ख़ुदा (जिसकी तारीफ़ अल्लाह ने की हो),
मैं तो बस उनके (ﷺ) सनाख़्वानों (प्रशंसकों) में शुमार चाहता हूँ।
जान वार कर भी न हो सके हक़ अदा उनके इक आँसू का,
मैं तो ग़ुलामों की फेहरिस्त (सूची) में नाम चाहता हूँ।
ﷺﷺﷺﷺ"