"एक दिन मैं उपदेश (वाइज़) के मंच पर बैठा था, मेरे चारों ओर द...
Ummah Post
6 May, 2025

"एक दिन मैं उपदेश (वाइज़) के मंच पर बैठा था, मेरे चारों ओर दस हज़ार लोगों की भीड़ थी, सबके दिल नर्म थे और आँखें बह रही थीं। मैंने अपने दिल में कहा: 'क्या गुज़रेगी अगर ये सब निजात (मुक्ति) पा जाएं और तू हलाक (बर्बाद) हो जाए?!' फिर मैंने दिल ही दिल में पुकारा: 'मौला! आक़ा! कल अगर तू मुझे अज़ाब (दंड) देने का फ़ैसला करे, तो इन लोगों को इसकी ख़बर न होने देना; मेरा नहीं तो अपने करम का ही भ्रम (लाज) रख लेना! कहीं ये लोग यह न सोचें कि अल्लाह ने उस बंदे को अज़ाब दिया है जिसने हमें उसकी राह दिखाई थी!'"

(सैय्यद अल-वाइज़ीन: इब्न अल-जौज़ी, रहमतुल्लाही अलैहि, मृ. 597 हिजरी)

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शासक हो तो ऐसा! मदायन के गवर्नर हज़रत सलमान फ़ारसी की बेमिसाल सादगी
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शासक हो तो ऐसा! मदायन के गवर्नर हज़रत सलमान फ़ारसी की बेमिसाल सादगी

हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ि.) एक बहुत महान सहाबी (पैगंबर के साथी) थे। सभी सहाबा इकराम में उन्होंने सबसे लंबी उम्र पाई थी। वह सभी लोगों की सेवा करते थे और बहुत ही सादा जीवन व्यतीत करते थे। हज़रत उमर (रज़ि.) ने अपने शासनकाल के दौरान उन्हें मदायन शहर का गवर्नर बना दिया था; लेकिन हज़रत सलमान फ़ारसी की सादग...