करें ग़ैर गर बुत की पूजा तो काफ़िर,
जो ठहराएं बेटा ख़ुदा का...
Ummah Post
7 June, 2025

करें ग़ैर गर बुत की पूजा तो काफ़िर,

जो ठहराएं बेटा ख़ुदा का तो काफ़िर,

झुकें आग पर बहरे-सजदा तो काफ़िर,

कवाकिब (सितारों) में मानें करिश्मा तो काफ़िर,

मगर मोमिनों पर कुशादा (खुली) हैं राहें,

परस्तश (पूजा) करें शौक़ से जिसकी चाहें!

इमामों का रुतबा नबी से बढ़ाएं,

नबी को जो चाहें ख़ुदा कर दिखाएं!

इमामों का रुतबा नबी से बढ़ाएं,

मज़ारों पे जा जा के नज़रें चढ़ाएं,

शहीदों से जा जा के मांगें दुआएं,

न तौहीद (एकेश्वरवाद) में कुछ ख़लल इससे आए,

न इस्लाम बिगड़े, न ईमान जाए।

— (अल्ताफ़ हुसैन हाली)

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