एक बार इमाम अहमद बिन हंबल (रहमहुल्लाह) बगदाद के बाज़ार में ग...
Ummah Post
7 June, 2025

एक बार इमाम अहमद बिन हंबल (रहमहुल्लाह) बगदाद के बाज़ार में गए। उन्होंने लकड़ियों का एक गट्ठा खरीदा और उसे अपने सर पर रखकर घर की ओर चल दिए। जब लोगों ने यह देखा तो (अफरा-तफरी के कारण) बाज़ार बंद हो गए। व्यापारी लोग कतार दर कतार रास्ता छोड़कर खड़े हो गए। व्यापारियों ने सलाम अर्ज़ किया और कहा, "हम इसे उठा लेते हैं।"

इमाम के हाथ कांप उठे, चेहरा लाल हो गया और आँखों से आँसू टपकने लगे और उन्होंने फ़रमाया: "हम तो मसीकीन (असहाय/ग़रीब) हैं, अगर ख़ुदा ने हमारे ऐबों पर पर्दा न डाल रखा हो तो हम ज़लील (अपमानित) हो जाएं।"

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