"रिज़्क़ (आजीविका/वरदान) सिर्फ यही नहीं कि जेब में माल (दौलत...
Ummah Post
7 June, 2025

"रिज़्क़ (आजीविका/वरदान) सिर्फ यही नहीं कि जेब में माल (दौलत) हो, बल्कि:

आँखों की रोशनी भी रिज़्क़ है।

दिमाग में ख़याल भी रिज़्क़ है।

दिल का एहसास भी रिज़्क़ है।

रगों में खून भी रिज़्क़ है।

यह ज़िंदगी खुद एक रिज़्क़ है।"

Share this article
गुलाम का आका को हकीमाना (बुद्धिमत्तापूर्ण) तमाचा
लेख

गुलाम का आका को हकीमाना (बुद्धिमत्तापूर्ण) तमाचा

जंग-ए-इस्कंदरिया (सिकंदरिया के युद्ध) में रूमी एक किले में बंद थे और मुसलमानों ने उस किले की घेराबंदी (محاصرہ) कर रखी थी। एक रोज़ रूमी मैदान में निकले और सिपहसालार हज़रत अम्र बिन अल-आस (रज़ियल्लाहु अन्हु) चंद सवारों को लेकर उनके मुक़ाबले हुए, घमासान की लड़ाई हुई। मुसलमान रूमियों को दबाते हुए बराबर क...