"उस आँख में कोई भलाई (खैर) नहीं जो रो न सके, और उस आवाज़ में...
Ummah Post
8 June, 2025

"उस आँख में कोई भलाई (खैर) नहीं जो रो न सके, और उस आवाज़ में कोई अच्छाई नहीं जो अल्लाह के कलाम (क़ुरआन) की तिलावत न करे।"

— शेख समीर मुस्तफा (अल्लाह उन्हें जल्द रिहा फरमाए)

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तुहफ़तुल हिंद और तक़्वियतुल ईमान: हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी की धार्मिक जागृति
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तुहफ़तुल हिंद और तक़्वियतुल ईमान: हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी की धार्मिक जागृति

हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी लिखते हैं कि: सबसे पहले जिस किताब ने मुझे इस्लाम के बारे में सही जानकारी दी और हिंदू समाज में रहकर मैं सोलह साल की उम्र से पहले मुसलमान हो गया, वह "तुहफ़त-उल-हिन्द" है। तुहफ़त-उल-हिन्द के मेरे हमनाम लेखक ने हिंदू धर्म की बहुदेववादी मान्यताओं और रीति-रिवाजों का वर्णन करन...