"उस आँख में कोई भलाई (खैर) नहीं जो रो न सके, और उस आवाज़ में कोई अच्छाई नहीं जो अल्लाह के कलाम (क़ुरआन) की तिलावत न करे।"
— शेख समीर मुस्तफा (अल्लाह उन्हें जल्द रिहा फरमाए)
"उस आँख में कोई भलाई (खैर) नहीं जो रो न सके, और उस आवाज़ में कोई अच्छाई नहीं जो अल्लाह के कलाम (क़ुरआन) की तिलावत न करे।"
— शेख समीर मुस्तफा (अल्लाह उन्हें जल्द रिहा फरमाए)