- "अगर गुनाहों की बू (दुर्गंध) होती, तो कोई भी हमारे साथ न बैठता।"
(ताबी ज़ाहिद मुहम्मद बिन वासिअ - रहमहुल्लाह, मृ. 123 हिजरी | तारीख़ दमिश्क: 56/158)
- "अगर अल्लाह का पर्दा (कमियों को छुपाना) न होता, तो कोई भी हमारे साथ न बैठता।"
(इमाम अल-हाफ़िज़ सुफ़ियान बिन उयैना - रहमहुल्लाह, मृ. 198 हिजरी | शुअबुल ईमान लि-बयहक़ी: 4203)
सौजन्य: अब्दुल अज़ीज़ नासिर