"अूसल (सिद्धांत) महज़ नियम नहीं होते, ये वो आतिशी (ज्वलंत) श...
Ummah Post
9 June, 2025

"अूसल (सिद्धांत) महज़ नियम नहीं होते, ये वो आतिशी (ज्वलंत) शब्द हैं जो अगर दिल में उतर जाएं तो इंसान को अकेला लश्कर (एक अकेले की सेना) बना देते हैं। जब एक आत्म-अभिमानी (स्वाभिमानी) मर्द अपने ज़मीर की सलीब उठाकर खड़ा होता है, तो ज़माना पहले उसका मज़ाक उड़ाता है, फिर कांपता है, और आखिरकार उसकी दहलीज़ पर सर झुका ही लेता है।" इसीलिए आप अपने उसूलों और नियमों पर पहाड़ की तरह जमे रहें, एक दिन लोग खुद ही लड़खड़ाते कदमों से आपकी ओर सरकने लगेंगे।

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एक बोर्ड और दो वाक्य:
लेख

एक बोर्ड और दो वाक्य:

एक अंधा आदमी एक इमारत के पास बैठा था और पास में एक बोर्ड रखा था जिस पर लिखा था, "मैं अंधा हूँ, कृपया मेरी मदद करें।" साथ में उसकी टोपी पड़ी हुई थी जिसमें कुछ सिक्के थे। एक आदमी वहाँ से गुज़र रहा था। उसने अपनी जेब से कुछ सिक्के निकाले और टोपी में डाल दिए। अचानक उसकी नज़र बोर्ड पर पड़ी। उसने बोर्ड...