"जब तक अपनी निजात (मुक्ति) का यक़ीन न हो, किसी गुनहगार का मज...
Ummah Post
11 June, 2025

"जब तक अपनी निजात (मुक्ति) का यक़ीन न हो, किसी गुनहगार का मज़ाक न उड़ाओ।"

— मौलाना रूमी (रहमहुल्लाह)

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चालाक अमीर और समझदार किसान की कहानी
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चालाक अमीर और समझदार किसान की कहानी

एक शातिर और चालाक मालदार (अमीर) शख़्स किसी गाँव में एक किसान के पास पहुँचा और उसे पार्टनरशिप (साझेदारी) का ऑफ़र दिया, कि रक़म मेरी होगी और मेहनत तुम्हारी! लेकिन जब फ़सल तैयार हो जाएगी तो जो हिस्सा ज़मीन के अंदर होता है वह तुम्हारा जबकि ऊपर वाला सारा मेरा होगा (यह चालाकी उसने इसलिए की क्योंकि ज़मीन म...