हया (शर्म व हया) हमेशा खैर (भलाई) ही लाती है।

अबू हुरैरा...
Ummah Post
11 June, 2025

हया (शर्म व हया) हमेशा खैर (भलाई) ही लाती है।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि आप अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:

"ईमान की सत्तर से ज़्यादा शाखाएँ (इक्शाम) हैं। और हया भी ईमान का एक हिस्सा है।"

— सहीह अल-बुख़ारी

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हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!
लेख

हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!

(नोट: इस घोषणापत्र के संबोधित व्यक्ति केवल शरिया विज्ञान (उलूम-ए-शरीयत) के छात्र हैं।) आरिफ़ों (अल्लाह की पहचान रखने वालों) ने शरिया के ज्ञान को इस तरह परिभाषित किया है कि यह अल्लाह का नूर (प्रकाश) है जो बंदे के सीने में रोशन हो जाता है। यह नूर दिल में चिराग की लौ की तरह पूरी तरह महसूस होता है। ब...