क्या इस हसरत (मलाल) का कोई मदावा (उपचार) है?
अब्दुर रहमान अल-सुनाबिही (रहमतुल्लाह अलैह) फ़रमाते हैं:
हम यमन से निकले ताकि आपके (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पास हाज़िर हों, जब जुहफ़ा पहुँचे तो एक सवार ने ख़बर दी कि हम पांच रातें पहले अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दफ़ना चुके हैं।
(सियर अलाम अन-नुबला लिज़-ज़हबी: 3/505)