• इमाम शाफ़ई (रहमतुल्लाह अलैह) फ़रमाते हैं:
«मन् तअल्लमल क़ुरआना अज़ुमत क़ीमतुहु»
"जो क़ुरआन सीख लेता है, उसकी क़द्र-ओ-क़ीमत बढ़ जाती है।"
[मुख़्तसर अल-मुज़नी]
• इमाम शाफ़ई (रहमतुल्लाह अलैह) फ़रमाते हैं:
«मन् तअल्लमल क़ुरआना अज़ुमत क़ीमतुहु»
"जो क़ुरआन सीख लेता है, उसकी क़द्र-ओ-क़ीमत बढ़ जाती है।"
[मुख़्तसर अल-मुज़नी]