"बारिश की बूंद सांप और सीप दोनों के मुंह में जाती है। सांप उसे ज़हर बनाता है और सीप उसे मोती। जैसी जिसकी पैदाइश (तखलीक़), वैसा उसका अमल..."
Ummah Post
"बारिश की बूंद सांप और सीप दोनों के मुंह में जाती है। सांप उसे ज़हर बनाता है और सीप उसे मोती। जैसी जिसकी पैदाइश (तखलीक़), वैसा उसका अमल..."