"میں ہنستا ہُوں تو کہتی ہے بتا اُلجھا ہُوا کیوں ہے
فَقط اِک...
Ummah Post
14 June, 2025

"میں ہنستا ہُوں تو کہتی ہے بتا اُلجھا ہُوا کیوں ہے

فَقط اِک ماں ہے جو میری پریشانی سمجھتی ہے"

"मैं हंसता हूँ तो कहती है बता उलझा हुआ क्यों है,

फ़क़त इक मां है जो मेरी परेशानी समझती है।"

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सख़ावत (उदारता) की एक बेमिसाल मिसाल: नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान
लेख

सख़ावत (उदारता) की एक बेमिसाल मिसाल: नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान

नाम भी मुज़फ़्फ़र था और रहते भी मुज़फ़्फ़रनगर में थे... पूरा नाम था "नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान"। मुज़फ़्फ़रनगर हिंदुस्तान में एक ज़िला है, उन भले दिनों में यह नवाब साहब की जागीर थी। नवाब साहब को इमारतें बनवाने (تعمیرات) का शौक़ था। इसी शौक़ को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने एक बहुत बड़े बाग़ के बीचों...