"ज़िंदगी बहुत अजीब है। 

हम किसी भी चीज़ के बिना आते हैं।...
Ummah Post
14 June, 2025

"ज़िंदगी बहुत अजीब है।

हम किसी भी चीज़ के बिना आते हैं।

फिर हम हर चीज़ के लिए लड़ते हैं।

फिर सब कुछ छोड़कर...

बिना किसी चीज़ के रुख़सत (विदा) हो जाते हैं।"

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चौधरी साहब का त्याग और धार्मिक विद्वानों से प्रेम
लेख

चौधरी साहब का त्याग और धार्मिक विद्वानों से प्रेम

...मदरसा के छात्रों के लिए एक चौधरी साल भर का गेहूं मदरसा के लिए वक्फ (दान) करता था। किसी शरारती (द्वेषी) शख्स ने मौलाना साहब के बारे में दुश्मनी और नफरत का इजहार ऐसा किया कि पता मालूम करते-करते चौधरी के घर पहुंच गया और कहने लगा: "चौधरी साहब! मदरसे जाकर पता तो करें कि छात्रों के नाम पर क्या खियान...