*हज़रत अल्लामा की क़ीमती नसीहत*

मैं जब दारुल उलूम देवबंद...
Ummah Post
14 June, 2025

*हज़रत अल्लामा की क़ीमती नसीहत*

मैं जब दारुल उलूम देवबंद से रुख़सत (विदा) होकर दारुल उलूम अशरफिया रांदेर के लिए मुदर्रिस (शिक्षक) बनकर चला, तो मैंने हज़रत अल-उस्ताद अल्लामा मुहम्मद इब्राहिम साहब बलियावी (क़ुद्दिस सिर्रहु) से अपनी आख़िरी मुलाक़ात में अर्ज़ किया: "हज़रत! मुझे कोई काम की बात बता दीजिए जिसे मैं हिर्ज़-ए-जान (जीवन का मूलमंत्र) बनाऊँ।"

हज़रत ने फ़रमाया: "मौलवी साहब!

1. फ़न (विषय की मूल आत्मा) को समझकर पढ़ाना, सिर्फ़ शरहों (टीकाओं/गाइड्स) को देखकर मत पढ़ाना; इससे इल्म (ज्ञान) आएगा।

2. और तलबा (छात्रों) को अपनी औलाद समझना; वे तुमसे मोहब्बत करेंगे।

3. और सुन्नत की पैरवी (अनुसरण) करना; लोगों के दिलों में तुम्हारी वक़्त (इज़्ज़त और अहमियत) पैदा होगी।"

ये तीन बातें मेरे लिए किस क़दर फ़ायदेमंद साबित हुईं, इसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता।

— मुफ़्ती सईद अहमद साहब पालनपुरी (रहमतुल्लाह अलैह)

[तुहफ़तुल अलमई, जिल्द 5, पृष्ठ 113]

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