"ऐ नफ़्स-ए-बेरहम (हे निर्दयी मन)! ज़िंदगी का एक और साल बीत ग...
Ummah Post
15 June, 2025

"ऐ नफ़्स-ए-बेरहम (हे निर्दयी मन)! ज़िंदगी का एक और साल बीत गया, तूने कब मुझे अपनी क़ैद से रिहाई देनी है।"

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हलाल कमाई की अहमियत और मौलाना क़ासिम नानौतवी की आजिज़ी (विनम्रता)
लेख

हलाल कमाई की अहमियत और मौलाना क़ासिम नानौतवी की आजिज़ी (विनम्रता)

हज़रत मौलाना मुहम्मद क़ासिम साहब नानौतवी (रहमतुल्लाही अलैहि) का मुज़फ़्फ़रनगर में एक थानेदार मुअतक़िद (भक्त/प्रशंसक) था। एक दिन उसने हज़रत मौलाना नानौतवी की दावत की। मौलाना ने देखा था कि थानेदार की कमाई मुश्तबा (संदिग्ध) और मशकूक है, इस वजह से उसकी दावत को नामंज़ूर फ़रमा दिया। थानेदार ने दावत क़ब...