इमाम शाफ़ई (रहमतुल्लाह अलैह) फ़रमाते हैं कि:

"जो व्यक्ति...
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16 June, 2025

इमाम शाफ़ई (रहमतुल्लाह अलैह) फ़रमाते हैं कि:

"जो व्यक्ति यह चाहता है कि अल्लाह तआला उसके दिल को खोले, उसे ज्ञान (इल्म) दे और हिकमत (बुद्धिमत्ता) अता करे, तो उसे चाहिए कि वह तन्हा (अकेला) रहे और कम खाए।

और वह मूर्खों (अहमक़ों) और ऐसे ज्ञानवानों (इल्म वालों) के साथ मिलने-बैठने से भी बचे जो न्याय (अद्ल) और शिष्टाचार (आदाब) नहीं जानते।"

[मनाक़िब अश्-शाफ़ई लिल-बैहक़ी: 2/172]

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अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर
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अल्लाह वालों की सोहबत (संगत) का असर

हज़रत मौलाना यूसुफ़ बनूरी (रहमतुल्लाही अलैहि) ने एक मर्तबा एक मजलिस (सभा) में इर्शाद फ़रमाया कि: एक साल हम हज के लिए गए, वहाँ उलेमा (विद्वानों) के ग्रुप में एक रिटायर्ड फ़ौजी अफ़सर भी था। तहज्जुद के वक़्त वह फ़ौजी अफ़सर हम सब से पहले उठकर बैतुल्लाह शरीफ़ चला जाता और उस वक़्त तवाफ़ करता था। मौलाना फ...