फ़िक्र-ए-माश (रोज़ी-रोटी की चिंता) ने सभी जज़बों को सर्द कर...
Ummah Post
16 June, 2025

फ़िक्र-ए-माश (रोज़ी-रोटी की चिंता) ने सभी जज़बों को सर्द कर दिया,

सड़कों पे दिन गुज़र गया हो के निढाल घर गए।

तन्दी-ए-सैल-ए-वक़्त (वक़्त के तेज़ बहाव) में यह भी है कोई ज़िंदगी,

सुबह हुई तो जी उठे, रात हुई तो मर गए।

— हज़ीं लुधियानवी

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