"मैं अपने आप में इतना खो गया कि मालूम न रहा कहाँ जा कर प्रकट...
Ummah Post
16 June, 2025

"मैं अपने आप में इतना खो गया कि मालूम न रहा कहाँ जा कर प्रकट (ज़ाहिर) हुआ।

मैं दरिया (नदी/समुद्र) से एक बूँद था, मगर उसी दरिया में डूब कर खुद दरिया बन गया।"

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50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक
लेख

50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक

एक बिजली के खंभे पर एक कागज चिपका देखकर मैं करीब चला गया और उस पर लिखी तहरीर (लिखावट) पढ़ने लगा। लिखा था.........! "बराय-ए-करम (कृपया) ज़रूर पढ़ें। इस रास्ते पर कल मेरा 50 रुपये का नोट खो गया है, मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता। जिसे भी मिले, बराय-ए-करम पहुँचा दे, नवाज़िश (कृपा) होगी.................