भरोसा वह नाज़ुक शीशा है जो एक बार टूट जाए, तो फिर कभी नहीं ज...
Ummah Post
29 June, 2025

भरोसा वह नाज़ुक शीशा है जो एक बार टूट जाए, तो फिर कभी नहीं जुड़ता; और अगर कभी जुड़ भी जाए, तो चेहरे दो ही नज़र आते हैं। 😔

Share this article
एक माँ का अटूट ईमान
लेख

एक माँ का अटूट ईमान

शायर-ए-ख़त्म-ए-नबुव्वत सैय्यद अमीन गीलानी (रहमतुल्लाह अलैह) अपनी जेल का वाक़िया बयान करते हुए कहते हैं: "एक दिन जेल का सिपाही आया और मुझसे कहा कि आपको दफ़्तर में सुपरिंटेंडेंट साहब बुला रहे हैं। मैं दफ़्तर पहुँचा तो देखा कि वालिदा साहिबा (माता जी) मेरी अहलिया (पत्नी) और बेटे सलमान गीलानी के साथ बै...