बीवियों की संख्या का चार होना और उसकी हक़ीक़त:
शादी के चार हुरूफ़ (अक्षर) हैं: श۔ा۔द۔ी
निकाह के चार हुरूफ़ हैं: न۔क۔ा۔ह۔ 😉
शौहर के चार हुरूफ़ हैं: श۔ौ۔ह۔र۔
बेगम के चार हुरूफ़ हैं: ब۔े۔ग۔म۔ 😂
बीवी के चार हुरूफ़ हैं: ब۔ी۔व۔ी۔
ज़ौजा के चार हुरूफ़ हैं: ज़۔ौ۔ज۔ा۔ ❤️
हिन्दी भाषा में भी 'पत्नी' के चार अक्षर हैं: प۔त्۔न۔ी۔ 🤭
'निसा' (महिलाएं) में भी चार हुरूफ़ हैं: न۔ि۔स۔ा۔ 🤫
और 'Wife' में भी चार अक्षर हैं: W۔I۔F۔E۔ 🤗
यहाँ तक कि इन सब नामों से बनने वाले लफ़्ज़,
'दुल्हन' में भी चार हुरूफ़ हैं: द۔ु۔ल۔्ह۔न۔ 🤔
इन सब की संख्या से इसी बात का इशारा मिलता है कि बीवियाँ चार ही होनी चाहिए। हाथ में भी चार उंगलियाँ और एक अंगूठा इसी बात की तस्दीक़ (पुष्टि) करता है। 😜
दिल के भी चार ख़ाने (चेंबर) हैं, हर एक ख़ाने में एक बीवी की तस्वीर होनी चाहिए। 🧐
ख़ैर सानू की (ख़ैर, हमें क्या)... 😢💔
अल्लाह तआला तमाम मर्दों की दिली मुराद पूरी फ़रमाए। आमीन 🤲
शादीशुदा हज़रात ज़रा एहतियात (सावधानी) से... क्योंकि 'डंडे' के हुरूफ़ भी चार हैं और 'जूते' के भी चार हुरूफ़ होते हैं! 😁
मुस्कुराते रहिए, मुस्कुराना सुन्नत है! 💖🥀