मेरी अर्ज़-ए-तमन्ना भी अजब अर्ज़-ए-तमन्ना है,
कि तुझ को मां...
Ummah Post
17 July, 2025

मेरी अर्ज़-ए-तमन्ना भी अजब अर्ज़-ए-तमन्ना है,

कि तुझ को मांगता हूं — और तुझ ही से मांगता हूं।

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पड़ोसियों का सम्मान और बेमिसाल सादगी:
लेख

पड़ोसियों का सम्मान और बेमिसाल सादगी:

हज़रत मौलाना सैयद असग़र हुसैन रहिमतुल्लाह अलैह (जो अपने मिलने वालों में हज़रत मियां साहब के नाम से मशहूर थे) दारुल उलूम देवबंद के उन उस्तादों में से थे जो शोहरत और नाम-ओ-नमूद (دکھاوے) से हमेशा कोसों दूर रहे। उन्होंने जीवन भर इस्लामी उलूम (ज्ञान) की तदरीस (शिक्षण) की सेवा की और हज़ारों छात्रों को अपन...