सुफ़यान थौरी (रहमहुल्लाह) फ़रमाते हैं: "लोगों में से सबसे ज़्यादा बहादुर इंसान वह है जो ख़्वाहिशात-ए-नफ़्स (मन की इच्छाओं) से बहुत ज़्यादा दूर रहने वाला है। छोटी और हक़ीर (तुच्छ) चीज़ों से ही हलाकत ख़ेज़ (विनाशकारी) चीज़ें जन्म लेती हैं।"
[अल-आदाब अश-शरिया: 251]