माता-पिता के झगड़ों का खामोश गवाह "बचपन"!!

दरवाजे की आड़...
Ummah Post
4 August, 2025

माता-पिता के झगड़ों का खामोश गवाह "बचपन"!!

दरवाजे की आड़ में खड़ी एक मासूम सी बच्ची, हाथ में खिलौना लिए, खामोश आँखों से सब देख रही है... न वह कुछ कह सकती है, न समझा सकती है... लेकिन हर चीख, हर आरोप, हर ऊँची आवाज़ उसके दिल में एक ज़ख्म छोड़ जाती है।

माता-पिता समझते हैं कि वे सिर्फ एक-दूसरे से लड़ रहे हैं,

मगर असल में उनकी लड़ाई का सबसे बड़ा नुकसान बच्चा उठाता है।

वह हर दिन, हर रात टूटता है… खामोशी से, तन्हाई में।

यह बचपन जो हँसी, मोहब्बत और सुरक्षा मांगता है, वह घर की चारदीवारी में डर, चीखों और आँसुओं में कैद हो जाता है।

माता-पिता के रिश्ते में कड़वाहट हो तो बच्चा न माँ का हो पाता है, न बाप का…

बल्कि वह सिर्फ "धुएँ" का वह साया बन जाता है जो ज़िंदगी भर अंधेरे में सांस लेता है!!

इसलिए गौर करें कि आप अपने बच्चों के लिए कैसे हैं???

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लेख

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