क़ुरआन देखते थे मोबाइल के हो गए,
उम्मत का सोचते थे मोबाइल क...
Ummah Post
4 October, 2024

क़ुरआन देखते थे मोबाइल के हो गए,

उम्मत का सोचते थे मोबाइल के हो गए।

दिल में नबी से प्यार की ख़ुशबू लिए हुए,

नेकी का बोलते थे मोबाइल के हो गए।

कितने हसीन दिन थे ग़म-ए-दीन को लेकर,

मस्जिद में बैठते थे मोबाइल के हो गए।

जिस सम्त (दिशा) निगाहों की ख़ताओं का ख़ौफ़ था,

चेहरे को फेरते थे मोबाइल के हो गए।

मअ्यूब (बुरा/नापसंद) हो इस्लाम की नज़रों में तो ऐसी,

ख़्वाहिश को रौंदते थे मोबाइल के हो गए।

इक पल भी मासिवाए ख़ुदा (ईश्वर के अलावा) पर फ़िदा न हो,

हम दिल को रोकते थे मोबाइल के हो गए।

- हुदहुद इलाहाबादी

Share this article
ज़िंदगी का मीनार हमेशा सीधा रहेगा !!
लेख

ज़िंदगी का मीनार हमेशा सीधा रहेगा !!

रवायत है कि सात सौ बरस पहले इस्फ़हान में एक मस्जिद बन रही थी। काम तक़रीबन ख़त्म हो चुका था और कारीगर छोटे-छोटे आख़िरी काम कर रहे थे। एक बूढ़ी औरत का वहाँ से गुज़र हुआ। वह अचानक खड़ी हो गई और मस्जिद के मीनार की जानिब इशारा करके कहने लगी कि यह मेरी नज़र में टेढ़ा नज़र आ रहा है। कारीगर हँसने लगे तो...