"रात सोकर गुज़ार देना और सुबह उस पर नादिम (शर्मिंदा) होना, र...
Ummah Post
11 August, 2025

"रात सोकर गुज़ार देना और सुबह उस पर नादिम (शर्मिंदा) होना, रात इबादत करके गुज़ारने और सुबह उस पर अकड़ते (अहंकार करते) फिरने से बेहतर है।"

— (मदारिजुस सालिकीन लिल-इब्निल क़य्यिम: 1/272)

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तौहीद के दरजात (एकेश्वरवाद के चरण)
लेख

तौहीद के दरजात (एकेश्वरवाद के चरण)

मुस्निद अल-हिंद, इमाम-ए-अकबर हज़रत शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी ؒ ने इर्शाद फ़रमाया है कि अक़ीदा-ए-तौहीद की तकमील (पूर्णता) के लिए चार दर्जों की तौहीद का मानना लाज़िम है, अगर किसी भी दर्जे की तौहीद में ज़र्रा बराबर भी कमी रह जाएगी तो इंसान हरगिज़ मुवह्हिद (एकेश्वरवादी) नहीं कहलाया जा सकता, वे चार दर...