"बर्दाश्त (सहनशीलता) के कानों से सुनो, रहम (दया) की आँखों से...
Ummah Post
22 August, 2025

"बर्दाश्त (सहनशीलता) के कानों से सुनो, रहम (दया) की आँखों से देखो, और मोहब्बत की ज़ुबान से बात करो।"

- मौलाना जलालुद्दीन रूमी

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हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
लेख

हज़रत थानवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

मुदर्रिसीन (शिक्षकों) को चाहिए कि हर तालिब-ए-इल्म (छात्र) को पूरा अरबी पढ़ाना ज़रूरी न समझें, जिसके अंदर मुनासबत (योग्यता) देखें, और फ़हम-ए-सलीम (सही समझ) पाएँ, उसको सब किताबें पढ़ा दें, और जिसको मुनासबत न हो, या फ़हम-ए-सलीम न हो, उसको बक़द्रे-ज़रूरत (ज़रूरत के मुताबिक़) मसाइल पढ़ा कर कह दें कि जाओ...