एक हेडमास्टर के बारे में एक वाक़या मशहूर है जब वह किसी स्कूल...
Ummah Post
26 August, 2025

एक हेडमास्टर के बारे में एक वाक़या मशहूर है जब वह किसी स्कूल में उस्ताद (शिक्षक) तैनात थे तो उन्होंने अपनी क्लास का टेस्ट लिया।

टेस्ट के खात्मे (समाप्ति) पर उन्होंने सबकी कॉपियां चेक कीं और हर बच्चे को अपनी-अपनी कॉपी अपने हाथ में पकड़कर एक कतार (लाइन) में खड़ा हो जाने को कहा। उन्होंने ऐलान किया कि जिसकी जितनी गलतियां होंगी, उसके हाथ पर उतनी ही छड़ियाँ मारी जाएँगी।

अगरचे (हालांकि) वह नर्म दिल होने के बाइस (कारण) बहुत ही आहिस्तगी से बच्चों को छड़ी की सज़ा देते थे ताकि ईज़ा (तकलीफ) के बजाय सिर्फ नसीहत हो, मगर सज़ा का खौफ अपनी जगह था।

तमाम बच्चे खड़े हो गए।

हेडमास्टर सब बच्चों से उनकी गलतियों की तादाद (संख्या) पूछते जाते और उसके मुताबिक उनके हाथों पर छड़ियाँ रसीद करते (मारते) जाते।

एक बच्चा बहुत घबराया हुआ था। जब वह उसके करीब पहुंचे और उससे गलतियों की बाबत दरियाफ़्त (पूछताछ) किया तो खौफ के मारे उसके हाथ से कॉपी गिर गई और वह घिघियाते हुए बोला:

"जी मुझे माफ़ कर दें, मेरा तो सब कुछ ही गलत है।"

मारेफ़त (आध्यात्मिक ज्ञान) की गोद में पले हुए हेडमास्टर उसके इस जुमले की ताब न ला सके और उनके हलक से एक दिलदोज़ (दिल को चीर देने वाली) चीख निकली। हाथ से छड़ी फेंककर ज़ार-ओ-क़तार (फूट-फूट कर) रोने लगे और बार-बार यह जुमला दोहराते:

"मेरे अल्लाह! मुझे माफ़ कर देना। मेरा तो सब कुछ ही गलत है।"

रोते-रोते उनकी हिचकी बंध गई। उस बच्चे से बस एक ही बात कहते:

"तुमने यह क्या कह दिया है, यह क्या कह दिया है मेरे बच्चे!"

"मेरे अल्लाह! मुझे माफ़ कर देना। मेरा तो सब कुछ ही गलत है।"

"ऐ काश हमें भी मारेफ़त-ए-इलाही (अल्लाह की पहचान) का ज़र्रा नसीब हो जाए और बेहतरीन और सिर्फ अल्लाह के लिए अमल करके भी दिल और ज़ुबान से निकले..... मेरे अल्लाह! मुझे माफ़ कर देना। मेरा तो सब कुछ ही गलत है..."

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लेख

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