"आज लोगों से भलाई की उम्मीद न करो, सिर्फ इतनी गुज़ारिश करो कि वे तकलीफ न पहुँचाएँ। जो तुम्हें अज़ियत (दुख) देने से बाज़ (दूर) रहता है, वह ऐसा ही है जैसे उसने तुम्हें इनामों से नवाज़ दिया हो।"
- अबू मुआविया बिन कुर्रह (रह.)
[तारीख़-ए-दमिशक़: 59/270]
"आज लोगों से भलाई की उम्मीद न करो, सिर्फ इतनी गुज़ारिश करो कि वे तकलीफ न पहुँचाएँ। जो तुम्हें अज़ियत (दुख) देने से बाज़ (दूर) रहता है, वह ऐसा ही है जैसे उसने तुम्हें इनामों से नवाज़ दिया हो।"
- अबू मुआविया बिन कुर्रह (रह.)
[तारीख़-ए-दमिशक़: 59/270]