"पाँव गीला किए बगैर समंदर तो पार किया जा सकता है, मगर आँसू बहाए बगैर ज़िंदगी नहीं गुज़ारी जा सकती!
- मुस्तनसर हुसैन तारड़"
"पाँव गीला किए बगैर समंदर तो पार किया जा सकता है, मगर आँसू बहाए बगैर ज़िंदगी नहीं गुज़ारी जा सकती!
- मुस्तनसर हुसैन तारड़"