"ऐ गुनाहों की कसरत (अधिकता) का बोझ उठाए, और गिरिया व ज़ारी (र...
Ummah Post
28 August, 2025

"ऐ गुनाहों की कसरत (अधिकता) का बोझ उठाए, और गिरिया व ज़ारी (रोने-धोने) से महरूम शख्स!

अपने अश्कों (आंसुओं) के क़हत (सूखे) पर रोया कर।

असलाफ़ (पूर्वज) तो बेहतरीन तक़्वा (परहेज़गारी) के मालिक थे मगर फिर भी रोते थे। तेरे पास गुनाहों का अंबार है और तू हंसता है।"

[अल-ख़वातिम लि-इब्न अल-जौज़ी: 254]

Share this article
शासक हो तो ऐसा! मदायन के गवर्नर हज़रत सलमान फ़ारसी की बेमिसाल सादगी
लेख

शासक हो तो ऐसा! मदायन के गवर्नर हज़रत सलमान फ़ारसी की बेमिसाल सादगी

हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ि.) एक बहुत महान सहाबी (पैगंबर के साथी) थे। सभी सहाबा इकराम में उन्होंने सबसे लंबी उम्र पाई थी। वह सभी लोगों की सेवा करते थे और बहुत ही सादा जीवन व्यतीत करते थे। हज़रत उमर (रज़ि.) ने अपने शासनकाल के दौरान उन्हें मदायन शहर का गवर्नर बना दिया था; लेकिन हज़रत सलमान फ़ारसी की सादग...