गुमनाम मगर किरदार वाले लोग
एक सबक आमोज़ (शिक्षाप्रद) पोस्ट...
घड़ी में तीन सुइयां होती हैं जिनमें से एक सुई सेकंड वाली सुई के नाम से मशहूर है।
यह सेकंड वाली सुई अपना वजूद (अस्तित्व) तो रखती है पर इसका ज़िक्र नहीं किया जाता। सब यही कहते हैं कि दस बजकर पंद्रह मिनट हो गए हैं। कभी किसी ने यूं नहीं कहा कि दस बजकर पंद्रह मिनट और चार सेकंड हुए हैं।
जबकि यह सेकंड वाली सुई बाकी दोनों सुइयों से ज़्यादा मेहनत व मशक़्क़त करती है और उन दोनों को भी आगे बढ़ने में मदद करती है।
हमारी ज़िंदगी में भी बहुत से लोग इसी सेकंड वाली सुई की मानिंद (तरह) होते हैं जिनका ज़िक्र तो कहीं नहीं होता लेकिन हमारे आगे बढ़ने में उनका किरदार (भूमिका) ज़रूर होता है।
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मनक़ूल (साभार)।
इंतखाब (चयन): इस्लामिक ट्यूब ऐप