भेड़ियों ने बकरियों के पक्ष में एक जुलूस निकाला कि, "बकरियों...
Ummah Post
5 October, 2025

भेड़ियों ने बकरियों के पक्ष में एक जुलूस निकाला कि, "बकरियों को आज़ादी दो! बकरियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है, उन्हें घरों में कैद करके रखा गया है।" जब एक बकरी ने यह आवाज़ सुनी, तो उसने दूसरी बकरियों से कहा, "सुनो, सुनो! हमारे पक्ष में जुलूस निकाले जा रहे हैं। चलो, हम भी निकलते हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते हैं।" एक बूढ़ी बकरी बोली, "बेटी, होश के नाखून लो (समझदारी से काम लो)! ये भेड़िये हमारे दुश्मन हैं, इनकी बातों में मत आओ।" लेकिन युवा बकरियों ने उसकी बात नहीं मानी और कहा, "जी, आपका ज़माना और था, यह आधुनिक युग है। अब कोई किसी के अधिकार नहीं छीन सकता। ये भेड़िये हमारे दुश्मन कैसे हो सकते हैं, ये तो हमारे अधिकारों की बात कर रहे हैं!"

बूढ़ी बकरी यह सुनकर बोली, "बेटा, ये तुम्हें बर्बाद करना चाहते हैं। अभी तुम सुरक्षित हो; अगर इनकी बातों में आ गईं, तो ये तुम्हें चीर-फाड़ कर रख देंगे।" बूढ़ी बकरी की यह बात सुनकर जवान बकरी ग़ुस्से में आ गई और कहने लगी, "अम्मा, तुम तो बूढ़ी हो चुकी हो, अब हमें हमारी ज़िंदगी जीने दो। तुम्हें क्या पता आज़ादी क्या होती है? बाहर ख़ूबसूरत खेत होंगे, हरे-भरे बाग़ होंगे, हर तरफ़ हरियाली होगी और खुशियाँ ही खुशियाँ होंगी। तुम अपनी नसीहत अपने पास रखो, अब हम और अधिक यह कैद बर्दाश्त नहीं कर सकतीं।" यह कहकर सब 'आज़ादी-आज़ादी' के नारे लगाने लगीं और भूख हड़ताल कर दी। चरवाहे (झुंड के मालिक) ने जब यह स्थिति देखी, तो मजबूरन उन्हें खोलकर आज़ाद कर दिया। बकरियाँ बहुत खुश हुईं और नारे लगाती, उछलती-कूदती बाहर भाग निकलीं। मगर यह क्या???? भेड़ियों ने उन पर हमला कर दिया और मासूम बकरियों को चीर-फाड़ कर रख दिया।

आज महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाले वास्तव में महिलाओं तक पहुँचने की आज़ादी चाह रहे हैं। वे इन मासूमों के ख़ून के प्यासे हैं; उन्हें महिलाओं के अधिकारों की नहीं, बल्कि अपनी गंदी प्यास (हवस) की फ़िक्र है। काश कोई समझे!!!!!!! वास्तव में, आज का लिबरल (उदारवादी) पुरुष महिला की आज़ादी नहीं, बल्कि महिला तक पहुँचने की आज़ादी चाहता है....

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मुल्ला नसीरुद्दीन का अमीर तैमूर को अनोखा मशवरा
लेख

मुल्ला नसीरुद्दीन का अमीर तैमूर को अनोखा मशवरा

एक दिन अमीर तैमूर लंग दरबार लगाए बैठा था। दरबारी अदब के साथ अपनी-अपनी जगहों पर खड़े हुए थे। तैमूर ने बगदाद के ख़लीफ़ाओं का हवाला देते हुए कहा, "उनके अलक़ाब (उपाधियाँ) बड़े आलीशान और रौबदार होते हैं। जैसे मुस्तक़ज़िर बिल्लाह, वासिक़ बिल्लाह, मोतसिम बिल्लाह और मुतवक्किल बिल्लाह वगैरह। मैं चाहता हूँ कि...