हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़िअल्लाहु तआला अन्हु फ़रमाते हैं...
Ummah Post
27 October, 2026

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़िअल्लाहु तआला अन्हु फ़रमाते हैं:

"जब तुम अपने (भाइयों) में से किसी को किसी गुनाह में मुब्तला देखो तो उसके ख़िलाफ़ अल्लाह से बद्दुआ न करो और न उसे बुरा-भला कहो, बल्कि अल्लाह से दुआ करो कि वह उसे आफ़ियत अता फ़रमाए।"

(अत-तौबा लि-इब्नि अबी अद-दुन्या: पृ. ९९)

एक शराबी सहाबी पर किसी ने लानत की तो नबी ﷺ ने फ़रमाया: "उस पर लानत न करो, अल्लाह की क़सम! मैं जानता हूँ कि यह अल्लाह और उसके रसूल से मुहब्बत रखता है।"

(सहीह बुख़ारी: ६७८०)

और फ़रमाया: "अपने भाई के ख़िलाफ़ शैतान की मदद न करो।"

(सहीह बुख़ारी: ६७८१)

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़िअल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया:

"मोमिन न तअना (ताना) देने वाला होता है और न लानत करने वाला।"

(सुनन तिर्मिज़ी: १९७७)

गुनाह से नफ़रत करनी चाहिए, गुनाहगार से नहीं। मोमिन अपने भाई की रुसवाई नहीं चाहता बल्कि उसकी हिदायत का तलबगार होता है, क्योंकि बद्दुआ और तअने से दिल सख़्त होते हैं और दुआ से इस्लाह के दरवाज़े खुलते हैं।

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