*वह फूल जो आप मेरी क़ब्र पर डालने का इरादा रखते हैं,*
*वह म...
Ummah Post
15 October, 2024

*वह फूल जो आप मेरी क़ब्र पर डालने का इरादा रखते हैं,*

*वह मेरी ज़िंदगी ही में मुझे दे दीजिए मुझे ख़ुशी होगी।*

*वह जज़्बात जो आप मेरे जाने के बाद लोगों के सामने ज़ाहिर करेंगे,*

*उन्हें मेरे जीते जी ही मुझसे कह दें ताकि मैं अपने अज़ीज़ों (प्रियजनों) के एहसास की ख़ुद क़द्र कर सकूँ।*

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हजरत मौलाना अशरफ अली साहब थानवी खुद अपनी नजर में
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हजरत मौलाना अशरफ अली साहब थानवी खुद अपनी नजर में

हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ अली थानवी (रहमतुल्लाही अलैहि) से थाना भवन में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बैअत (आध्यात्मिक दीक्षा) का अनुरोध किया, जिसके जवाब में आपने उन्हें अपना परिचय देते हुए लिखा: "मैं एक खुश्क (सरल/रूखा) तालिब-ए-इल्म (विद्यार्थी) हूँ। इस ज़माने में जिन चीज़ों को दरवेशी (सूफ़ीवाद...