*मुस्कुराएं* 

मुश्ताक अहमद युसुफ़ी साहब कहते हैं कि, ज़मा...
Ummah Post
15 October, 2024

*मुस्कुराएं*

मुश्ताक अहमद युसुफ़ी साहब कहते हैं कि, ज़माना-ए-तालिबे-इल्मी (छात्र जीवन) में एक बार उर्दू के पेपर में लफ़्ज़ (शब्द) "शुदा" से चार लाहिक़े (प्रत्यय) लिखने को कहा गया। मैंने जवाब में लिखा:

"शादी शुदा, गुम शुदा, ख़त्म शुदा, तबाह शुदा"

अगले दिन उस्ताद-ए-मोहतरम (आदरणीय शिक्षक) ने पेपर्स चेक करके वापस कर दिए तो मुझे लाहिक़ों वाले सवाल में चार में से आठ नंबर मिले थे। मैंने उस्ताद साहब से फ़ालतू नंबरों के मुतअल्लिक़ (बारे में) पूछा तो मुस्कुरा कर कहने लगे:

"चार नंबर सही जवाब के हैं और चार नंबर सही तरतीब (क्रम) के!"

Share this article
मशहूर अरबी हिकायत: "सच के गवाह"
लेख

मशहूर अरबी हिकायत: "सच के गवाह"

कहते हैं एक बस्ती ऐसी थी जो झूठ बोलने और झूठी गवाही देने में मशहूर थी। उसी बस्ती में एक पुरुष और महिला ने गुप्त रूप से, लेकिन पूर्ण शरई तरीके से निकाह कर लिया। काज़ी, गवाह और शरई ज़रूरतें सब पूरी थीं। कुछ समय बाद दोनों में अनबन हो गई। पति ने पत्नी को घर से निकाल दिया और उसे तमाम शरई अधिकारों से भ...